सोमवार, 15 नवम्बर 2010

भ्रष्टाचार आज का पवित्र त्योहार


बेईमानी की आई बयार

भ्रष्टाचार आज का पवित्र त्योहार

खाके कसम हर कोई रिश्वखोरी की

करता अपने काम की शुरुआत

माना रोग ये नया नहीं

लेकिन ये बढ़ता ही गया

गरीबों की जेब खाली करता गया

की इसकी ज्यों-ज्यों दवा

देश के लोगों के लिए

चाहे निवाला जुटाना हो

या रक्षा के लिए उनकी

खरीदने हों हथियार

फ़ौजियों के लिए वर्दी की बात हो

या मरने के बाद

उनके ताबूत का हो सवाल

चाहिए ऊपर से नीचे तक

सबको अपना अपना हिस्सा

बेईमानी की आई बयार

भ्रष्टाचार आज का पवित्र त्योहार

चारा पशुओं का भी नहीं छोड़ा

संसद में सवाल पूछने तक के लिए

खाते में धन जोड़ा

दूरसंचार से कमाया गया धन

यूरिया से भी उगाई गई

बेईमानी की फसल

हर तरफ बह रही है

रिश्वत की गंगा

बहन की शादी के बोझ तले

बेरोजगार भाई ने चुना फांसी का फंदा

बेईमानी की आई बयार

भ्रष्टाचार आज का पवित्र त्योहार

हवाला है अब कारोबार

शेयर है नाजायज कमाई का औज़ार

रियल स्टेट में लगा के पैसा

लगाओ बेईमानी की संपत्ति का अंबार

इतने सस्ते में बिक रहा आजकल ईमान

हजारों का नौकर

खेल रहा है करोड़ों और अरबों में

अपने खुद के खेत का मालिक

जी रहा है

बधुवां मजदूर से भी बदतर हालत में

बेईमानी की आई बयार

भ्रष्टाचार आज का पवित्र त्योहार

विश्वसनीयता का स्टैम्प भी हो गया

फर्जीवाड़े का शिकार

घोटाले का आदर्श है इतना बढ़ गया

देश की सीमा पर लड़ने वालों के नाम

करें नेता और अधिकारी राज

ऐसे फैल रहा इनका राज

नहीं है खड़े होने की जगह शहरों में

शहरों को खड़ा करने वालों के लिए

लोगों को दे के छत और नींद

ढूढें खुद के लिए दो मुट्ठी जमीन

बेईमानी की आई बयार

भ्रष्टाचार आज का पवित्र त्योहार

देश का सम्मान बढ़ाना

मतलब अपना-अपना धंधा चमकाना

गुलामी के आज के आलम में

यही है सबसे बड़ा त्योहार

गुलामीं को संजोएं

और आजादी को खोयें

क्वींस बेटन कंधो पर लेकर

गाँव-गाँव गली-गली ढोयें

बेईमानी की आई बयार

भ्रष्टाचार आज का पवित्र त्योहार

खेलों में सबसे बड़ा खेल

नाम है इसका कॉमनवेल्थ

नाम पर इसके

चारों तरफ से लिया कॉमन को लूट

भर दिया घरों में उनके

विकास का ठूंठ

खेल के इस खेल से

अब हर कोई घबराता है

फिर हो कॉमनवेल्थ

बार-बार दोहराता है

बेईमानी की आई बयार

भ्रष्टाचार आज का पवित्र त्योहार

खदान हो, आसमान हो या समुद्र से व्यापार हो

हर जगह घोटालों की अट्टाहस

करोड़ो-अरबों इनके हाथ का मैल

100 रुपये कमाने के लिए

आम आदमी सुबह शाम पेरा जाता है ऐसे

जैसे कोल्हू का बैल

स्कूल, कॉलेज, ऑफिस, कोर्ट हो या कचहरी

बढ़ती है आगे गाड़ी यहाँ

नोटो के ज़ोर से

ईमानदारी पर चोट से

बेईमानी की आई बयार

भ्रष्टाचार आज का पवित्र त्योहार

1 टिप्पणियाँ:

sonal singh ने कहा…

दोस्त, तुमने तो सब लोगों को धर कर फींच दिया। बहुत खूब! तुम्हारी इसी कला के तो हम कायल हैं!पर इसे तुम्हारी ग्लानि समझूँ की तुम्हारी भूल, कि तुमने कॉर्पोरेट कोंपनियों के जन संपर्क विभाग में हो रहे घोटालों पर कुछ भी नहीं कहा? क्यों?