सोमवार, 28 जून 2010

चल चलें चलतें रहें ...



चल चलें चलतें रहें
जिंदगी की राह में कदम धरते रहें
हर कदम के साथ
साथ सबको लेकर चलते रहें
छूटने न पाये कोई
धर्म हो उसका कोई
चाहे जिस जाति का हो
बोलता हो भाषा कोई
चाहे हो जिस क्षेत्र का
सबको बांधते चलें
चल चलें चलतें रहें
जिंदगी की राह में कदम धरते रहें
हर कदम के साथ
साथ सबको लेकर चलते रहें
हमें देश को बचाना है
हमें देश को बनाना है
इससे पहले लोगों को बताना है
हम ब्राह्मण नहीं
हम ठाकुर नहीं
हम चौधरी भी नहीं
और हममें से कोई चमार नहीं
हम सब हैं इन्सान
चल चलें चलतें रहें
जिंदगी की राह में कदम धरते रहें
हर कदम के साथ
साथ सबको लेकर चलते रहें
इस तरह से विकास हो
शहर में गाँव हो
और गाँव में शहर हो
मिट जाये इतना भेद इनका
रोजगार के लिये न हो पलायन किसी का
मकानों की जगह, जगह हो घरों का
चल चलें चलतें रहें
जिंदगी की राह में कदम धरते रहें
हर कदम के साथ
साथ सबको लेकर चलते रहें
ख़त्म हो उपहार अमीरी का
नष्ट हो अभिशाप गरीबी का
ये अंतर ख़त्म होना चाहिए
देश के प्रत्येक क्षेत्र से
समाज के हर स्तर से
गंगा बराबरी की बहनी चाहिए
चल चलें चलतें रहें
जिंदगी की राह में कदम धरते रहें
हर कदम के साथ
साथ सबको लेकर चलते रहें....

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